मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Thursday, June 23, 2011

अहले वफ़ा के शहर में क्या हादसा मिला: Saleem Khan

अहले वफ़ा के शहर में क्या हादसा मिला
मुझसे जो शख्स मिला सिर्फ़ बेवफ़ा मिला

मैंने ज़िन्दगी भर उसे अपना हबीब ही समझा
उसको ये क्या हुआ कि वो रक़ीबों से जा मिला

उम्र भर जिसके साथ रहे मोहब्बत की राह में
उसी का पता ज़िन्दगी भर मैं पूछता मिला

दोस्त बन बन के मुझे दर्द देते रहे सभी
अपनों के बीच कुछ ऐसा सिलसिला मिला

12 comments:

prerna argal said...

दोस्त बन बन के मुझे दर्द देते रहे सभी
अपनों केबीच कुछ ऐसा सिलसिला मिलाbahut khoob.badhaai.

शिखा कौशिक said...

मैंने ज़िन्दगी भर उसे अपना हबीब ही समझा
उसको ये क्या हुआ कि वो रक़ीबों से जा मिला
Saleem ji kya khoob likha hai .vah-vah ...

शालिनी कौशिक said...

दोस्त बन बन के मुझे दर्द देते रहे सभी
अपनों के बीच कुछ ऐसा सिलसिला मिला
dosti ka rishta to hota hi dard bhara hai.SALEEM KHAN ji bahut shandar likha hai.badhai.

DR. ANWER JAMAL said...

अहले वफ़ा के शहर में क्या हादसा मिला
दाम घोड़े के दिए मगर गधा मिला

मैं हबीब समझता रहा जिसे उम्र भर
एक रोज़ वह मेरी जेब काटता मिला

उम्र गुज़ार दी हमने जिसकी मुहब्बत में
वह दूध वाले से नैन लड़ाता मिला

दोस्त बनते रहे और दर्द भी देते रहे
दोस्ती का हमें बस यह सिला मिला

शिकवा न कर आंसू न बहा तू
कम नहीं जो तू हमें ज़िंदा मिला

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

आपकी इस उत्कृष्ट प्रवि्ष्टी की चर्चा आज शुक्रवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!

sushma 'आहुति' said...

दोस्त बन बन के मुझे दर्द देते रहे सभी
अपनों के बीच कुछ ऐसा सिलसिला मिला... bhut hi khubsurat abhivakti....

ana said...

lajwab sher....anwar jamal ji ki tippani bhi lajwab

दर्शन कौर धनोए said...

वाह क्या शायरी है जनाब आपकी तो है ही अच्छी पर अनवर साहब ने तो कमाल ही कर दिया ...वाह !!!

डा. श्याम गुप्त said...

आजकल ये है कैसा सिलसिला |
जो तुझे मिला,मुझे क्यों न मिला|

अब भला तुमसे क्या गिला,
जो मुझे मिला तुझे कब मिला |

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

खूबसूरत गज़ल

Pappu Parihar said...

बड़ा बेजार किया, कितना इंतजार किया |
तुझसे प्यार किया, तुने न इज़हार किया |

Pappu Parihar said...

बड़ा बेजार किया, कितना इंतजार किया |
तुझसे प्यार किया, तुने न इज़हार किया |