मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Friday, June 17, 2011

हुनर हो कोई भी बड़ी ही कोशिशें माँगे

मेरी पहली ई किताब के हवाले से चंद अशआर:-


विकास की खातिर मदद के नाम पर यारो
लुटा रहे लाखों करोड़ों कारखानों पर

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हिन्दोस्ताँ को जगदगुरु यूँ ही नहीं कहते सभी
डायवर्सिटी होते हुए भी है यहाँ पर यूनिटी

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मेरे दिल की तसल्ली कहाँ गुम हो तुम
ज़िंदगी में तुम्हारी कमी रह गई

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क़ामयाबी के जश्न से पहले, देख क्या खोया और क्या पाया
बन गया 'साब' कल जो था 'लेबर', फिर भी 'रोटी' न वो जुटा पाया

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हुनर हो कोई भी बड़ी ही कोशिशें माँगे
न खूँ में होता है, न मिलता ये दुक़ानों पर

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7 comments:

Navin C. Chaturvedi said...

link par qitaab khulane par thoda samay lagta hai

शालिनी कौशिक said...

विकास की खातिर मदद के नाम पर यारो
लुटा रहे लाखों करोड़ों कारखानों पर
aur tab bhi vikas nahi ho raha
sara desh pradooshan hi dho raha.

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हिन्दोस्ताँ को जगदगुरु यूँ ही नहीं कहते सभी
डायवर्सिटी होते हुए भी है यहाँ पर यूनिटी
bahut khoob,sahi kaha naveen ji.

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मेरे दिल की तसल्ली कहाँ गुम हो तुम
ज़िंदगी में तुम्हारी कमी रह गई
vah

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क़ामयाबी के जश्न से पहले, देख क्या खोया और क्या पाया
बन गया 'साब' कल जो था 'लेबर', फिर भी 'रोटी' न वो जुटा पाया
jutaya to hai
akelapan
sath apno ka chhoota
matlabi sangam.

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हुनर हो कोई भी बड़ी ही कोशिशें माँगे
न खूँ में होता है, न मिलता ये दुक़ानों पर
bilkul sahi

एस.एम.मासूम said...

हुनर हो कोई भी बड़ी ही कोशिशें माँगे
न खूँ में होता है, न मिलता ये दुक़ानों पर
.
वह भाई वह शास्त्री जी के बताए रास्ते से यहाँ तक पहुंचा और कुछ बेहतरीन कलम पढने को मिले. शुक्रिया

Kunwar Kusumesh said...

सादगी के साथ गर बाते निकल कर आयेंगी.
तब कहीं जा करके ये ऊँचाइयाँ दे जायेंगी.

Vaanbhatt said...

बहुत खूब...हुनर ना विरासत में मिलता है...ना बाजारों में बिकता है...बड़ी मेहनत से मिलता है...

DR. ANWER JAMAL said...

आपको पहली ई बुक मुबारक हो !
शेर अच्छे लगे !!

Navin C. Chaturvedi said...

शालिनी जी, एस. एम. मासूम जी, कुसुमेश जी, वाणभट्ट जी और अनवर भाई बहुत बहुत शुक्रिया|