मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Tuesday, June 14, 2011

पाँव के छालेँ

लोग तो सेब से गालों पर ग़ज़ल कहते हैं
हम मगर सूखे निवालोँ पर ग़ज़ल कहते हैं ।
हम ने पाई काँटोँ की चुभन से राहत
इसलिए पाँव के छालों पर ग़ज़ल कहते हैं ।
तहसीन मुनव्वर

4 comments:

prerna argal said...

wah bahoot khoob "pavn ke chalon per gajal likhten hain" badiyaa najm.badhaai sweekaren

नीलांश said...

bahut sunder

Dr. Ayaz Ahmad said...

धन्यवाद प्रेरणा जी और नीलाशं जी

sushma 'आहुति' said...

khubsurat...