मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Sunday, June 26, 2011

वो कोई नहीं है...

पिला कर गिराना नहीं कोई मुश्किल,
गिरे को उठाये वो कोई नहीं है.
ज़माने ने हमको दिए ज़ख्म इतने,
जो मरहम लगाये वो कोई नहीं है.

शायर-हरबंस सिंह 'निर्मल'
प्रस्तुति-शालिनी कौशिक 

9 comments:

DR. ANWER JAMAL said...

शायरी अच्छी है और हमारे फिर थोड़ा सा मरहम भी है ।
जिसे लगवाना हो क्लिनिक पर आ जाए ।

शिखा कौशिक said...

bahut sateek bat .Anwar ji ne bhi apni clinic ke prachar ka achcha tareeka socha hai .

prerna argal said...

bahoot khoobsoorat,yathart ko batati saarthak najm.badhaai sweekaren.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत उम्दा!

sushma 'आहुति' said...

very nice linse....

Kunwar Kusumesh said...

तुम्हें चोट लगती,ये अहसास भी है.
जो बीमारे-उल्फत है वो ख़ास भी है.
कभी तुम जो इतना परेशान हो तो,
चले आओ मरहम मेरे पास भी है.

शालिनी कौशिक said...

utsah vardhan hetu aap sabhi ka bahut bahut dhanyawad.kunvar ji ka sher bahut pasand aaya .bahut sundar likha hai.

सलीम ख़ान said...

बहुत उम्दा!

शालिनी कौशिक said...

dhanyawad saleem ji.