मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Thursday, June 23, 2011

तू मानव बनना सीख ले ................

सीता मुझमें ढूँढने वाले
पहले राम तो बनना सीख ले
राम भी बनने से पहले
तू मानव बनना सीख ले
हर सीता को राम मिले
ऐसा यहाँ कब होता है
राम के वेश में ना जाने
कितने रावण हैं विचर रहे
इस दुनिया रुपी वन में
आजाद ना कोई सीता है
कदम कदम पर यहाँ
भयभीत हर इक सीता है
रात के बढ़ते सायों में
महफूज नही कोई सीता है
सीता को ढूँढने वाले मानव
तू नर तो बनना सीख ले
सीता के भक्षक रावणों से
पहले सीता को बचाना सीख ले
पग-पग पर अग्निपरीक्षा लेने वाले
पहले तू मानव तो बनना सीख ले
तू मानव बनना सीख ले ................

6 comments:

शिखा कौशिक said...

bilkul sahi kaha hai aapne sita ki pariksha lene valon ko pahle khud manav banna seekhna hoga .sarthak prastuti .

शालिनी कौशिक said...

vartman par sarthak likha hai aapne.

सलीम ख़ान said...

yaqeenan manaw bannaa bahut mushkil hai ek manaw ko............!

रेखा श्रीवास्तव said...

bahut achchha rasta dikhaya hai, khud seeta ki apeksha karne vale unake vyaktitva se parichit bhi nahin hai bas suna aur chahne lage.

Dr. shyam gupta said...

----सही कहा...यह आचरण का मामला है.....यदि पुरुष चाहता है सीता तो उसे राम बनना ही पडेगा...और यदि वह राम को चाहती है तो उसे सीता ही बनना पडेगा ---रावणों को मौक़ा न मिले इसलिए गलतियाँ करना/ दोहराना बंद करना पडेगा...

AlbelaKhatri.com said...

waah !