मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Monday, June 20, 2011

जाने कहाँ गए ..गज़ल ...डॉ श्याम गुप्त....

सीधे थे सच्चे सरल सब  जाने कहाँ गए |
सत-न्याय पर चलिए सदा राहें बता गए |

वे हंस से शुचि औ सरल द्युतिमान धवल थे,
केकी के नृत्य-रंग युत,  जीवन सजा गए |


कोकिल की कूक से मधुर, चातक की आन थे ,
अब तो  चमन में हर तरफ, कौवे ही छागये |

वे सारे सत्यनिष्ठ , दृढ प्रतिज्ञ , कर्मवीर ,
माँ भारती की आन पे,  जीवन लुटा गए |


अब क्या चमन में सैर को जाए कोई ऐ श्याम ,
कांटे ही हर गुलशन सजे, वो गुल कहाँ गए  ||


5 comments:

शालिनी कौशिक said...

dr.shyam ji aapki chinta swabhavik hai kintu hame koi chinta nahi jab aap jaise fankar maujood hain.bahut badhiya prastuti.badhai aapko v shan mushayere ki.

prerna argal said...

कोकिल की कूक से मधुर, चातक की आन थे ,
अब तो चमन में हर तरफ, कौवे ही छागये |

वे सारे सत्यनिष्ठ , दृढ प्रतिज्ञ , कर्मवीर ,
माँ भारती की आन पे, जीवन लुटा गए |bahut sunder aaj ki sachai ko bahut shaandaar dhang se najm ke dwara prastut kiya hai.badhaai

शिखा कौशिक said...

bahut khoob .badhai

Navin C. Chaturvedi said...

कोकिल की कूक से मधुर, चातक की आन थे ,
अब तो चमन में हर तरफ, कौवे ही छागये |
बहुत खूब श्याम जी .........

डा. श्याम गुप्त said...

धन्यवाद...शालिनी,हीखा जी, प्रेरणा जी व चतुर्वेदी जी....आभार,,,,