मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Tuesday, June 28, 2011

गज़ल की गज़ल.-२ ..कैसे कैसी गज़लें .....ड़ा श्याम गुप्त...

शेर मतले का न हो तो कुंवारी ग़ज़ल होती है |
हो काफिया भी जो नहीं बेचारी ग़ज़ल होती है |

और भी मतले हों, हुश्ने तारी ग़ज़ल होती है ,
हर शेर मतला हो, हुश्ने हजारी ग़ज़ल होती है |

हो रदीफ़ काफिया नहीं, नाकारी ग़ज़ल होती है ,
मकता बगैर हो ग़ज़ल वो मारी ग़ज़ल होती है |

मतला भी मकता भी रदीफ़ काफिया भी हो,
सोच समझ के लिख के सुधारी ग़ज़ल होती है |

हो बहर में सुर ताल लय में, प्यारी ग़ज़ल होती है,
सब कुछ हो कायदे में वो संवारी ग़ज़ल होती है |

हर शेर एक  भाव हो वो  जारी ग़ज़ल होती  है,
हर शेर नया अंदाज़ हो वो भारी ग़ज़ल होती है |

मस्ती में कहदें झूम के गुदाज़कारी ग़ज़ल होती है |
उनसे तो जो कुछ भी कहें वो सारी ग़ज़ल होती है |

जो वार दूर तक करे  वो करारी ग़ज़ल होती है,
छलनी हो दिल आशिक का शिकारी ग़ज़ल होती है |

हो दर्दे-दिल की बात दिलदारी ग़ज़ल होती  है,
मिलने का करें वायदा मुतदारी ग़ज़ल होती है |

तू गाता चल ऐ यार,  कोई  कायदा न देख,
कुछ अपना ही अंदाज़ हो खुद्दारी ग़ज़ल होती है |

जो उसकी राह में कहो  इकरारी ग़ज़ल  होती  है ,
अंदाज़े बयाँ हो श्याम' का वो न्यारी ग़ज़ल होती है ||

7 comments:

शालिनी कौशिक said...

जो उसकी राह में कहो इकरारी ग़ज़ल होती है ,
अंदाज़े बयाँ हो श्याम' का वो न्यारी ग़ज़ल होती है ||bahut sundar kaha shyam ji,
yahan aap khush ho pesh karen jise vah pyari gazal hoti hai,
aur ukhad jane par jo pesh karen vah hamari gazal hoti hai.

शिखा कौशिक said...

Shayam ji -itni tarah ki gazal hoti hai aaj hi avgat hue is rahsay se .aabhar

रविकर said...

बड़ी प्यारी गजल होती है |
पक्की यारी गजल होती है
मतला काफिया रदीफ़ --
ओह !
बड़ी भारी गजल होती है ||

नीरज गोस्वामी said...

पूरे ग़ज़ल काव्य की व्याख्या कर दी है आपने...मनोहारी रचना...नहीं ग़ज़ल

नीरज

डा. श्याम गुप्त said...

धन्यवाद शालिनी जी....

"aur ukhad jane par jo pesh karen vah hamari gazal hoti hai.".....

.... वो न्यारी गज़ल होती है

डा. श्याम गुप्त said...

धन्यवाद शिखाजी --व रविकर...
---मस्ती में लिखो झूम के तो सारी गज़ल होती है....

डा. श्याम गुप्त said...

धन्यवाद नीरज जी...आभार...