मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Thursday, June 9, 2011

नयों को हौसला भी दो, न ढूंढो ग़लतियाँ केवल

हमें इक दूसरे से गर गिला शिक़वा नहीं होता|
तो अंग्रेजों ने हम को इस क़दर बाँटा नहीं होता|१|

नयों को हौसला भी दो, न ढूंढो ग़लतियाँ केवल|
बड़े शाइर का भी हर इक क़ता आला नहीं होता|२|

हज़ारों साल पहले सीसीटीवी आ गई होती|
युधिष्ठिर जो शकुनि के सँग जुआ खेला नहीं होता|३|

अदब से पेश आना चाहिए साहित्य में सबको|
कोई लेखक किसी भी क़ौम का चेहरा नहीं होता|४|

ज़रा समझो कि 'कॉरपोरेट' भी अब मानता है ये|
गृहस्थी से जुड़ा इन्सान लापरवा' नहीं होता|५|

11 comments:

Dr. shyam gupta said...

नयों को हौसला भी दो, न ढूंढो ग़लतियाँ केवल|
बड़े शाइर का भी हर इक क़ता आला नहीं होता|२|

--वाह! क्या बात कही है ,बन्दा आदाब बजा लाता है...हुज़ूर...बेहतरीन ..

Dr. Ayaz Ahmad said...

बेहतरीन अशआर

DR. ANWER JAMAL said...

अच्छे शेर कहे आपने ।
आपका स्वागत है तहे दिल से ।

वन्दना said...

बहुत सुन्दर

शालिनी कौशिक said...

अदब से पेश आना चाहिए साहित्य में सबको|
कोई लेखक किसी भी क़ौम का चेहरा नहीं होता|४|
naveen ji bahut kam shabdon me aapne bahut badi bat kah dee hai aur meri dr.anwar jamal ji se ye guzarish hai ki ve aapki uprotk panktiyon ko blog sheershak me shamil karen jisse is blog par aane vale sabhi bhali bhanti parichit ho saken.

Navin C. Chaturvedi said...

आद. श्याम भाई साब, अयाज़ भाई, अनवर भाई, वंदना जी और शालिनी जी आप सभी का बहुत बहुत शुक्रिया|

शालिनी जी:-
माँ शारदे के अनुग्रह से जो कृति स्वरूप पाने के उपरांत लोकार्पित हो गयी - वह लोक संपत्ति [व्यावसायिक इस्तेमाल छोड़कर] हो गयी| आप खुशी से इस का इस्तेमाल करिएगा| बल्कि यह मेरे लिए खुशक़िस्मती की बात होगी|

शिखा कौशिक said...

blog jagat ke liye bahut mahtvapoorn kriti.

आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' said...

sargarbhit rachna... gagar men sagar.

किलर झपाटा said...

शेरों में नवीन स्टाइल है।

इस्मत ज़ैदी said...

हमें इक दूसरे से गर गिला शिक़वा नहीं होता|
तो अंग्रेजों ने हम को इस क़दर बाँटा नहीं होता|१|

bilkul sahi kaha aap ne Naveen ji ,lekin ab ye hamari zimmedari hai ki ham saare gile shikwe mita kar hamesha ek rahne ka pran karen aur use nibbhaen bhi

Navin C. Chaturvedi said...

शिखा कौशिक जी, आचार्य जी, किलर झपाटा जी और दीदी इस्मत जी आप सभी का बहुत बहुत शुक्रिया| आप लोगों के आशीर्वाद से हौसला मिलता है| इस्मत दीदी आप की कही गई बातें आज के दौर में अधिक प्रासंगिक हो गई हैं|