मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Saturday, June 4, 2011

तनहा हैं....डा श्याम गुप्त....

आज महफ़िल में हम तनहा हैं |
कैसे कहदें  मगर तनहा हैं |

आप  जो आ बसे दिल हमारे,
कैसे कहदें ए दिल, तनहा हैं |

लूट लें ना ये तनहाइयां ,
धडकनों की ये शहनाइयां |
एक  यादों की  तस्वीर सी,
बनगयीं दिलकी गहराइयां |

सच है महफ़िल में हम तनहा हैं,
यूं तो कहने को हम तनहा हैं |
हम सफ़र ना कोइ बागवाँ,
इस चमन में यूं हम तनहा हैं |

रूह  में  आप  ऐसे  समाये,
कैसे कहदें ऐ दिल तनहा हैं |

बन के ख़्वाबों की ताबीर आये, 
कैसे कहदें कि हम तनहा हैं ॥



6 comments:

Dr. Ayaz Ahmad said...

वाह क्या कह दिया श्याम गुप्त जी !

DR. ANWER JAMAL said...

कैसे कह दें कि आप तन्हा हैं
तीरंदाज़ी में आप तन्हा हैं

बड़ी बी तो साथ होंगी आपके ?
फिर कैसे कहीं आप तन्हा हैं

यादे मौला में भी आप लगे होंगे
प्रभु संग है तो क्या आप तन्हा हैं

न हम तन्हा और न तुम तन्हा
मुशायरे में हैं , कैसे आप तन्हा हैं

शालिनी कौशिक said...

सच है महफ़िल में हम तनहा हैं,
यूं तो कहने को हम तनहा हैं |
हम सफ़र ना कोइ बागवाँ,
इस चमन में यूं हम तनहा हैं |
man ke bhavon kee bahut khoobsurat abhivyakti.

JHAROKHA said...

bahut hi sundar bahut hi bhavpravan prastuti
do,anwar jamal ji ki baat se puri tarah sahmat hun.
bahut bahut pasand aaya ---tanha a -dil.
betreen
sadar
naman
poonam

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!

डा. श्याम गुप्त said...

धन्यवाद ..अयाज़ जी, अनवर जी..शालिनी जी..शास्त्री जी एवं पूनम जी...
तू सदा साथ है तेरे,श्याम,
कौन कहता है कि हम तनहा हैं।