मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Friday, June 3, 2011

आँख तो फिर भी भर आई होगी ............

कुछ अश्क तो झड़ते होंगे
आँख से तेरी भी
कुछ कहानी
मेरी भी तो
कहते होंगे
दर्द जो दिया तूने
उसे इक नया
नाम तो देते होंगे
यादों को मेरी
तेरी यादों में
संजोते तो होंगे
जो पल
साथ बिताये थे
याद दिलाते होंगे
कभी रुलाते होंगे
कभी हँसाते होंगे
कभी यादों के नश्तर
चुभाते तो होंगे
कभी ज़ख्म हरे
होते तो होंगे
कहीं कोई नासूर
भी तो होगा
उसे कुरेदते तो होंगे
अश्क मरहम बन वहां
टपक तो जाते होंगे
मुझे तडपाने की चाह में
क्या तू न तड़पता होगा
मुझे रुलाने की चाह में
क्या तू न रोता होगा
कुछ यादों के कफ़न
उम्र भर ओढ़ने पड़ते हैं
कहीं तू भी तो भटका होगा
मेरी चाह में
कभी तो सिसका होगा
एक टीस बन
दर्द कभी तो
छलछलाता होगा
कुछ न कुछ तो
दिल तेरा भी
बुदबुदाता होगा
मेरे दर्द की याद में
कुछ चाहतें तेरी भी तो
कसमसाई होंगी
कभी याद न आई हो मगर
आँख तो फिर भी
भर आई होगी
आँख तो फिर भी
भर आई होगी ............

9 comments:

शालिनी कौशिक said...

bhavpoorn nice post.

Sunil Kumar said...

कभी याद न आई हो मगर
आँख तो फिर भी
भर आई होगी
आँख तो फिर भी
भर आई होगी ............
खूबसूरत अहसास,दिल को छू लेने वाली , बधाई

DR. ANWER JAMAL said...

वंदना जी , जिससे आपको शिकवा है उसकी ओर से कुछ यूँ कहा जाएगा :

अश्क भी झड़ते हैं दिल भी रोता है
हम भी रोते हैं जब दर्दे दिल होता है

तेरी यादें ही अब हैं जीवन मेरा
नाम तेरा हर पल मेरे लबों पे होता है

हुस्न उधर मजबूर इश्क इधर माज़ूर
इसी का नाम तो हिज्र होता है

मैं ग़म न करूँ तू परवाह न कर
सहेंगे हर सितम जो हम पे होता है

रूलाती है मुहब्बत तुझे भी मुझे भी
वर्ना दुनिया में ऐसा कब होता है

आपके भाव दिल को छू गए।

prerna argal said...

मेरे दर्द की याद में
कुछ चाहतें तेरी भी तो
कसमसाई होंगी
कभी याद न आई हो मगर
आँख तो फिर भी
भर आई होगी
आँख तो फिर भी
भर आई होगी ............
bahut sunder panktiyan.bahut achche bhaav liye saarthak rachanaa.badhaai sweekaren.aabhaar

please visit my blog.thanks.

शिखा कौशिक said...

bahut sarthak abhivyakti .badhai

Kunwar Kusumesh said...

मेरी चाह में
कभी तो सिसका होगा
एक टीस बन
दर्द कभी तो
छलछलाता होगा

वाह वाह क्या बात है
दर्द का छलछलाना ग़ज़ब ढा गया.
छलछलाने शब्द का प्रयोग बहुत बढ़िया किया है वंदना जी आपने.वाह.

कुश्वंश said...

कभी याद न आई हो मगर
आँख तो फिर भी
भर आई होगी
आँख तो फिर भी
भर आई होगी ............

दिल को छू गए।

Anjana (Gudia) said...

कभी याद न आई हो मगर
आँख तो फिर भी
भर आई होगी
आँख तो फिर भी
भर आई होगी ............

badi khoobsurati se dard bhara hai in panktiyon mein Vandana ji!

डा. श्याम गुप्त said...

अच्छी कहानी है...सदाबहार...