मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Wednesday, June 1, 2011

भूख का डर

जो लोग यहाँ बूढ़े शजर काट रहे हैं
नादान हैं ये अपना ही सर काट रहे हैं ।
कुछ लोग यहाँ भूख से वाकिफ़ ही नहीं हैं
कुछ लोग मगर भूख का डर काट रहे हैं।

तहसीन मुनव्वर
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9 comments:

prerna argal said...

behatrin najm.badhaai aapko.

शिखा कौशिक said...

bahut khoob .

DR. ANWER JAMAL said...

अच्छी पोस्ट ।

Kunwar Kusumesh said...

good.

Anjana (Gudia) said...

bahot khoob!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

सन्देशपरक अशआर!

musafir said...

बहुत खूब.

डा. श्याम गुप्त said...

मुकम्मिल हालाते बयां....

शालिनी कौशिक said...

bahut sahi kaha ayaz ji.aaj ke samaj me ye hi dard badhta ja raha hai.