मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Tuesday, May 24, 2011

जाओ मुझे नहीं करनी तुमसे कोई बात...


लिख डाला है नाम तुम्हारा पन्नो पर ,
रो पड़ी तो मिट जायेगी मेरी झूठी आस,

जाओ मुझे नहीं करनी तुमसे कोई बात,

छू जाते हो क्यूँ अहसास बनकर ,
किसी दिन जलकर बन जयुंगी मैं राख ,

जाओ मुझे नहीं करनी तुमसे कोई बात,

कतरा कतरा यूँही बिखरती रही अगर मैं,
तो रह जयुंगी इक दिन मैं बन केवल लाश ,

जाओ मुझे नहीं करनी तुमसे कोई बात,

मिलते नहीं हो खयालो में भी ठीक से,
दे जाते हो आधी अधूरी प्यास,

जाओ मुझे नहीं करनी तुमसे कोई बात,

कितना सताते हो आ आ के ख्वाबो में,
क्यूँ दे जाते हो टूटी  हुई सी इक आस,

जाओ मुझे नहीं करनी तुमसे कोई बात,

क्यूँ जलाते हो उमीदो के दिए ,
लग जाती हाई मेरी सुखी चौखट पर आग,

जाओ मुझे नहीं करनी तुमसे कोई बात.

[नीलम]

21 comments:

DR. ANWER JAMAL said...

क्या बात है , वाह !

शालिनी कौशिक said...

कतरा कतरा यूँही बिखरती रही अगर मैं,
तो रह जयुंगी इक दिन मैं बन केवल लाश
dil ke bhavon kee marmik abhivyakti.neelam ji bahut khoob.
क्या बात है , वाह

शिखा कौशिक said...

क्या बात नहीं है , वाह

DR. ANWER JAMAL said...

@ Shikha ji ! Apki wah bhi nirli hai aur Aah bhi.

सलीम ख़ान said...

sundar rachna

कुश्वंश said...

छू जाते हो क्यूँ अहसास बनकर ,
किसी दिन जलकर बन जयुंगी मैं राख ,

क्या बात है , वाह !

Dr. shyam gupta said...

ye he kyaa??

AlbelaKhatri.com said...

waah !

अरूण साथी said...

अति सुन्दर

Shah Nawaz said...

वाह!

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

खूबसूरती से लिखे एहसास

Neelam said...

Anwer ji shukriya.

Neelam said...

Shalini ji bahut bahut shukriya.

Neelam said...

Shikha ji kya baat nahi hai wah..:D
shukriya.

Neelam said...

salim ji shukriya.

Neelam said...

kushvansh ji shukriya.

Shyam ji shukriya.

Neelam said...

ALBELA JI MAIL PAR APNA SUJHAAV DENE KE LIYE BAHUT BAHUT ABHAAR...MAIN KOSHISH KARUNGI.

Neelam said...

@ Arun ji shukriya.

@ shah nawaz ji shukriya.

Neelam said...

Sangeeta ji shukriya.

Mukesh Kumar Sinha said...

sir wah...ke layak nahi hai...ye to subhan allah ke layak hai neelu jee..:)

bahut pyar se aapne dard ko ukera hai..sach me massa..allah...kya likhte ho aap:)

Vaanbhatt said...

इस सादगी पे कौन ना मर जाये ऐ ख़ुदा...सीधे सपाट शब्दों में नाराज़गी...