मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Friday, May 27, 2011

श्री तुफ़ैल चतुर्वेदी जी की शायरी



हर एक बौना मेरे क़द को नापता है यहाँ|
मैं सारे शहर से उलझूँ मेरे इलाही क्या||
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 श्री तुफ़ैल चतुर्वेदी जी

अच्छे आदमियों के अच्छे विचार ख़ुशी देते हैं। श्री तुफ़ैल चतुर्वेदी जी के बारे में जानकर भी खु़शी हुई और वातायन ब्लॉग पर जाकर भी।
कुछ चुनिंदा शेर जो मुझे पसंद आए, आप भी देखिए,
धन्यवाद ।
मुकम्मल देखने के लिए जाएं आप वातायन पर,
जिसके लिए हमें निमंत्रित किया था श्री नवीन जी ने।
उनका भी धन्यवाद।


मेरे पैरों में चुभ जाएंगे लेकिन|
इस रस्ते से काँटे कम हो जाएंगे||
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हम तो समझे थे कि अब अश्क़ों की किश्तें चुक गईं|
रात इक तस्वीर ने फिर से तक़ाज़ा कर दिया||
*** 
अच्छा दहेज दे न सका मैं, बस इसलिए|
दुनिया में जितने ऐब थे, बेटी में आ गये||
***
नई बहू से इतनी तबदीली आई|
भाई का भाई से रिश्ता टूट गया||
***
तुम्हारी बात बिलकुल ठीक थी बस|
तुम्हें लहज़ा बदलना चाहिए था||
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14 comments:

Kunwar Kusumesh said...

अच्छे अशआर.

prerna argal said...

अच्छा दहेज दे न सका मैं, बस इसलिए|
दुनिया में जितने ऐब थे, बेटी में आ गये||bahut yathart batata hua sher.samaaj ki kuriti ko ujaager karata hua.badhaai aapko.



please visit my blog and leave the comments also.

वन्दना said...

शानदार ………सुन्दर प्रस्तुति।

Navin C. Chaturvedi said...

ब्लॉग वातायन पर पधारने के लिए बहुत बहुत आभार अनवर भाई| आदरणीय तुफैल चतुर्वेदी जी के अशआर हैं ही ऐसे कि हर कोई बोल उठता है - 'भई वाह"|

वन्दना said...

आपकी पोस्ट यहाँ भी है………http://tetalaa.blogspot.com

शालिनी कौशिक said...

tufail chaturvedi ji kee lekhni se ru-b-ru karane ke liye anwar jamal ji ka bahut bahut shukriya.

Er. सत्यम शिवम said...

आपकी उम्दा प्रस्तुति कल शनिवार (28.05.2011) को "चर्चा मंच" पर प्रस्तुत की गयी है।आप आये और आकर अपने विचारों से हमे अवगत कराये......"ॐ साई राम" at http://charchamanch.blogspot.com/
चर्चाकार:Er. सत्यम शिवम (शनिवासरीय चर्चा)

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

अच्छा दहेज दे न सका मैं, बस इसलिए|
दुनिया में जितने ऐब थे, बेटी में आ गये||


बहुत खूब

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

बहुत प्‍यारे शेर हैं। शुक्रिया इन्‍हें पढवाने का।

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हंसते रहो भाई, हंसाने वाला आ गया।
अब क्‍या दोगे प्‍यार की परिभाषा?

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत सुन्दर और मनभावन शायरी!

डा. श्याम गुप्त said...

वाह!..... क्या वाह वाह ज़ारी है.....ये शायरी है या कथ्य...स्टेटमेन्ट्स...

DR. ANWER JAMAL said...

@ डा. श्याम गुप्ता जी ! समझने वाले समझ लेंगे कि ये शेर हैं या कथ्य हैं ?
हम आप क्यों टेंशन लें ?

http://www.hamarivani.com/blog_post.php?blog_id=1218

Navin C. Chaturvedi said...
This comment has been removed by the author.
शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' said...

हम तो समझे थे कि अब अश्क़ों की किश्तें चुक गईं|
रात इक तस्वीर ने फिर से तक़ाज़ा कर दिया||
तुफ़ैल साहब
बहुत अच्छा शेर है...