मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Tuesday, May 3, 2011

दिल की बीमारी से भी बचाती है शेरो शायरी


ग़ज़ल 

वो हाल मेरा मुझ से सुने  मेरी ज़ुबानी 
अफसाना ए ग़म कोई किस्सा न कहानी 

इन्सान की नहीं ज़र की परस्तार है दुनिया
समझाया बहुत दिल ने मगर एक न मानी

जो बात समंदर की ख़मोशी ने कही है
वो बात कहां कह सकी दरिया की रवानी

रखूं न कलेजे से लगाकर तो ख़ता है
तुम दो तो सही प्यार में कुछ अपनी निशानी

ये साया ए रहमत जो मेरे सर पे है ‘अन्सार‘
काम आ गई बरसों की मेरी अश्क-फ़शानी

 'अंसार' सिद्दीक़ी
ख़ेल ख़ूर्द, कैराना, मुज़फ़्फ़रनगर, उ. प्र.

अश्क-फ़शानी-आंसू बहाना

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आज हमने अखबार में वह रिसर्च पढ़ी जो हम पहले से जानते हैं. हम सभी जानते हैं किअपने मन की बात कह डालने से दिलो-दिमाग हल्का हो जाता है. बस इतना ध्यान ज़रूर रखें कि गहरी बातें सिर्फ अपने हमदर्दों से ही शेयर करनी चाहियें. हमारा 'मुशायरा' भी हमारे दिलो-दिमाग को ताजगी दे रहा है. हमारा मुशायरा दिल के रोगों से बचा रहा है. अब यह साइंटिफिक रूप से प्रमाणित हो चुका है .

दिल के लिए कविता पाठ
नाजुक दिल पर काबू पाने के लिए मुक्त कंठ से कविता-पाठ कीजिए। स्विट्जरलैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ बेरने के डॉ़  डायटिच वान वोनिन और जर्मन की यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिटेन के डॉ़  हेनरिक वैटरमैन ने एक ही दिशा में रोचक और महत्त्वपूर्ण शोध कर दिल के रोगियों को राहत दी है। शोध बताता है कि आज की तेज जिंदगी में जब हर कोई तनाव में है तो चोट दिल पर पड़ना जाहिर-सी बात है। किसी भी भाषा में किया गया कविता-पाठ आपको भावों की गहराई में डुबो देता है। मन कहीं केंद्रित हो जाता है और गम भूल जाता है, तनाव घटने लगता है और आनंददायी अनुभूति मिलती है।
इससे श्वास से संबंधित रोग भी काबू में आने लगते हैं। हृदय से संबंधित रोगों को भी मात्र कविता-पाठ से काबू किया जा सकता है। अध्ययन में शोधकर्ताओं ने तो कई वर्ग बना कर लोगों को कविता सुनाई, मगर ताजा परीक्षण में सात हृदय रोगियों को चुना गया।
पहले चरण में 15 मिनट तक उनके हृदय की धड़कन और रक्तचाप मापा गया। दूसरे चरण में 30 मिनट तक कविता सुनाई गई, पूरी लय के साथ। रोचक बात यह रही कि कविता-पाठ पूर्ण होने के बाद रोगी कविता की याद रही पंक्तियां स्वयं गुनगुनाने लगे। उनके चेहरे में भी बदलाव नजर आया।

6 comments:

शालिनी कौशिक said...

bahut gyanvardhak baten sheyar kee hain aapne .aabhar.

Kunwar Kusumesh said...

ग़ज़ल बेहतरीन है.अंसार साहब को बधाई.

दर्शन कौर धनोए said...

रखूं न कलेजे से लगाकर तो ख़ता है
तुम दो तो सही प्यार में कुछ अपनी निशानी

बहुत सुंदर है ये दिल की यह गुफ्तगू !अंसारी साहेब !

शिखा कौशिक said...

bahut sundar gazal .badhai.

shanno said...

उम्दा गजल...

shanno said...

अनवर जी, साथ में मुक्त कंठ से कविता पाठ करने के बारे में बढ़िया जानकारी दी है आपने...शुक्रिया.