मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Tuesday, May 24, 2011

आहे मज़लूम

देर ही से सही मगर इक दिन
आहे मज़लूम असर दिखाती है
सामने जिसके हुक्मरानोँ की
हुक्मरानी भी हार जाती है ।
..................................
हलीम साबिर

3 comments:

DR. ANWER JAMAL said...

सच कहा आपने ।

Anjana (Gudia) said...

bilkul sahi! :-)

Vaanbhatt said...

काश कि ये सच हो पाता...अति सुन्दर...