मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Wednesday, May 25, 2011

कहें कैसे कि वो ''जिगर का टुकड़ा है '.

हर तरफ़ भेड़ियों ने घेरा है
मेरी हस्ती का मुझ पे पहरा है


मौत का खौफ उसे होता ही नहीं ;
जो बहुत हादसों से गुजरा है .

सुना रही थी वो दर्द अपना रोते-रोते
मगर दुनिया की नजर में वो एक मुजरा है .

परायों की बेरुखी के परवाह है किसे ?
यहाँ तो अपनों की बेवफाई का खतरा है .

जिन्दगी भर समझता रहा खुद को दरिया ;
आखिरी साँस में समझा कि तू एक कतरा है .

जलील करके हमें घर से निकालाजिसने 
कहें कैसे कि वो ''जिगर का टुकड़ा है '.

सच को सच कहने का हौसला न रहा ;
कैसी मजबूरियों ने आकर हमें जकड़ा है . 
                                             शिखा कौशिक 

15 comments:

prerna argal said...

परायों की बेरुखी के परवाह है किसे ?
यहाँ तो अपनों की बेवफाई का खतरा है .
bahut sunder rachanaa.suner shabdon ka chyan badhaai aapko,


plese visit my blog and leave the comments also.

arqam said...

मौत का खौफ उसे होता ही नहीं ;
जो बहुत हादसों से गुजरा है .


सुना रही थी वो दर्द अपना रोते-रोते
मगर दुनिया की नजर में वो एक मुजरा है .
good

DR. ANWER JAMAL said...

आप बुरा न मानें प्लीज़ लेकिन यह ग़ज़ल बहुत अच्छी बन जाती अगर इसमें आप दो चार बातों का ध्यान रखतीं ख़ासकर मुखड़ा तो लगाया होता ।

क्या कमियाँ हैं ?
आपके पूछने पर कुंवर कुसुमेश जी बता देंगे।

मैंने आपके लिए एक मुखड़ा कहा था ताकि आपको भेंट कर सकूँ

धूप से गुज़रा छाँव से गुज़रा है
इश्क़ मेरा हर मक़ाम से गुज़रा है

बज़ाहिर यह आपको ठीक लगेगा लेकिन जब मैंने फ़ोन पर यह शेर अपने उस्ताद को सुनाया तो उन्होंने कमी बताकर इसे रिजेक्ट कर दिया ।

सादर ।

आपके जवाब का इंतेज़ार रहेगा

शालिनी कौशिक said...

bahut khoob bhavpoorn gazal,aabhar.

शिखा कौशिक said...

bura manne ki koi baat hi nahi hai ,aap ustaj ji se poochhkar mukhda sujhayeeye ;main use isme jod doongi GURU GHANTAL JI .

DR. ANWER JAMAL said...

Ha Ha Ha

@ शिखा जी ! आज आपके मुंह से अपनी तारीफ़ सुनकर सचमुच मज़ा आ गया .
आपसे मैंने निवेदन किया है कि आप अपनी ग़ज़ल को जनाब कुंवर कुसुमेश जी को दिखाएँ .
सब करेक्शंस हो जायेंगे.

Kunwar Kusumesh said...

अरे क्यों भाई साहब, क्यों उन्हें मेरा नाम suggest कर रहे हैं ?
वैसे इज्ज़त अफजाई का शुक्रिया.

DR. ANWER JAMAL said...

हर तरफ़ भेड़ियों ने घेरा है
मेरी हस्ती का मुझ पे पहरा है


@ शिखा जी ! उस्ताद मोहतरम को फ़ोन किया और उन्हें आपकी ख़्वाहिश बताई तो उस्ताद मोहतरम ने आपके लिए उपरोक्त मुखड़ा इनायत फ़रमाया।
आप इसे अपनी ग़ज़ल में लगा सकती हैं और इम्प्रूवमेंट के लिए आप उनसे संपर्क भी कर सकती हैं। मुज़फ़्फ़रनगर से उन्हें भी गहरा ताल्लुक़ है।
.
.
@ कुसुमेश जी ! ज़्यादा जानने वाले से पूछने के लिए न कहा जाए तो क्या किया जाए ?
कमतर से बेहतर की जानिब सफ़र की यही वाहिद सबील है।

Vaanbhatt said...

इतनी अच्छी ग़ज़ल को...क्यों परिभाषाओं मं बंधातें है...वैसे हम जैसे नए प्रयोगवादियों के लिए...जमाल जी स अनुरोध है...कि ग़ज़ल कि संरचना पर एक लेख लिखें...

DR. ANWER JAMAL said...

@ वाणभट्ट जी ! इस रचना में Thought अच्छा है लेकिन ग़ज़ल के तत्व नदारद हैं और ऐसा गुरू के अभाव के कारण हुआ। हिंदी ब्लॉग जगत में यह विडंबना आम है।
दूसरी विडंबना आप जैसे लोग हैं जो ग़ज़ल की अलिफ़ बे तक नहीं जानते और कह दिया कि
1. ग़ज़ल अच्छी है
2. इसे परिभाषाओं में न बाँधा जाए

फिर आप क्यों चाहते हैं कि मैं एक लेख लिखकर ग़ज़ल की संरचना आपको समझाऊँ ?

ग़ज़ल में रदीफ़ , क़ाफ़िया , बहर और वज़्न का ध्यान रखना ज़रूरी होता है।
ग़ज़ल का पहला शेर मतला और अंतिम शेर मक़्ता कहलाता है।
ये होती है ग़ज़ल की संरचना लेकिन इसे समझने के लिए और अपने अभ्यास को चेक करवाने के लिए एक उस्ताद ज़रूर चाहिए।

जो लोग अपनी कमियाँ दूर नहीं करना चाहते, उनकी मर्ज़ी लेकिन वे जानने वालों पर रायज़नी न करें ।

मैं अपने अंदर कोई कमी नहीं चाहता और न ही उनके अंदर , जिन्हें मैं अपने मंच पर जगह देता हूँ और अपना समझता हूँ।
...और करें भी क्यों जब ख़ुदा के फ़ज़्ल से हमारे पास ऐसे शायर मौजूद हैं जो कि अपने फ़न में पुख़्ता हैं ।

शिखा कौशिक said...

Anwar ji -margdarshan ke liye shukriya.aapke dwara bataye gaye ''mukhde ''ko jod diya hai .ustad ji ko bhi hardik dhanywad .Kusumesh ji se aagrah hai ki ve Gazal ki kamiyon ki or dhayan aakarshit karayen .isse mujhe hardik prassanta hogi .

Vaanbhatt said...

अनवर जी मै आपसे सहमत हूँ...ये सच है की लोग बिना गुरु के भांज रहे हैं...आपकी ये पोस्ट हमारे जिसे लोगों के लिए सटीक है...कृपया इसको अन्यथा ना लें...आपने जो बातें लिखीं हैं...शायद बहुतों को मालूम ना हों..मुझे तो कतई नहीं थीं...शुक्रिया...

Kunwar Kusumesh said...

भाई अनवर जमाल जी, आपके 4th कमेन्ट की बेबाकी पसंद आई.

डा. श्याम गुप्त said...

सब कह दिया गया ...अब क्या कहा जाय..

(सलीम ख़ान) said...

sahi kaha aapne