मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Saturday, May 28, 2011

शेरो शायरी की महफ़िल किरतपुर में

आज के ज़माने में हर किसी को जल्दी है
वर्ना शहर में इतने हादसे नहीं होते
-नाज़िम अशरफ़ किरतपुरी

मुस्कुराने की बात करते हो
किस ज़माने की बात करते हो
-रामौतार जमाल

हो जिसका ताल्लुक़ तेरी इबादत से
मेरी रगों में उतर वो लहू या रब
-नाज़िम अशरफ़

रात गई हर बात को लेकर
दिन निकला जज़्बात को लेकर
-आसिफ़ अंदाज़

फ़ुर्सत के लम्हात कहाँ
पहले से हालात कहाँ
-मौलवी क़ादिर

ख़ुद नहीं खाते हैं खिला देते हैं हम मेहमान को
हम फ़क़ीरों के घरों की मेज़बानी और है
-गौहर किरतपुरी

तेज़ रफ़्तार रहरौ जो आए नज़र
ख़ुद को महफ़ूज़ कर रास्ता छोड़ दे
-नासिर किरतपुरी

हरामो-नेक को तो आप जानें
शिकम तो रोटियाँ पहचानता है
-नज़र किरतपुरी

कल रात मेहमान शायर उमर बछरायूंनी के सम्मान में अंजुमने दर्से अदब की जानिब से एक नशिस्त आयोजित की गई। उसी के कुछ चुनिंदा शेर अर्ज़ हैं ।

आप की चाहत अल्लाह अल्लाह
रोज़ नए बोहतान मिले हैं
-उमर बछरायूंनी

शब्दार्थ
बोहतान-इल्ज़ाम , रहरौ-पथिक

2 comments:

Vaanbhatt said...

वाह...ख़ूबसूरत संकलन...

शालिनी कौशिक said...

sangrahniy post.