मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Friday, May 6, 2011

"पेश-ए-ख़िदमत हैं-कुछ सुझाव" (डॉ.रुपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


नॉन स्टॉप मुशायरा से जुड़े मेरे अज़ीज़ दोस्तों!
आप सभी सहयोगियों का, पाठकों का और सभी फॉलोवर्स का मुशायरा ब्लॉग पर इस्तकबाल और ख़ैरमक़दम करता हूँ!
नॉन स्टॉप मुशायरा के लिए बादस्तूर संचालन के लिए मैंने ब्लॉग के प्रबन्धक ज़नाब डॉ. अनवर ज़माल के सहयोग से एक नियमावली तैयार की है! आशा है कि आप इससे सहमत होंगे। फिर भी यदि किसी साथी को इनमें कोई आपत्ति हो तो वह अपनी बात को ज़ोरदार तरीके से मुझ तक पहुँचा सकता है। क्योंकि यह अभी सिर्फ सुझाव ही हैं। आप सब यदि इस पर अपनी मुहर लगा देंगे तो इसे नियमावली के रूप में ब्लॉग के किसी कोने में चस्पा कर दिया जाएगा। जम्हूरियत में सभी को अपनी बात रखने का हक़ है!
आपकी ख़िदमत में कुछ सुझाव नीचे दिये जा रहे हैं-
1. सद्र की हैसियत से मैं चाहता हूँ कि एक पोस्ट को 8 घंटे का समय मिले लेकिन यह पोस्ट ऐसी होनी चाहिए जो कि मुशायरेके लिए विशेष रूप से तैयार की गई हो। विशेष रूप से तैयार की गई पोस्ट से आशय ऐसी पोस्ट से है जो सबसे पहले मुशायरे में ही पेश की जा रही हो या फिर अगर उस पोस्ट को कवि और शायर अपने ब्लॉग पर पहले ही पेश कर चुके हैं तो कम से कम एक सप्ताह के बाद ही मुशायरे में पेश करें।
2. एक रचनाकार एक के बाद एक कितनी भी पोस्ट लगातार लगा सकता है लेकिन उन सभी लगातार पोस्ट को एक ही पोस्ट माना जाएगा और उसे मिलने वाले 8 घंटे का समय उसकी पहली पोस्ट से शुरू माना जाएगा।
3. अगर कोई रचनाकार अपनी रचना कई अन्य ब्लॉग्स पर पेश कर रहा है तो ठीक उसी समय में वह मुशायरे में उन्हें पेश न करे ताकि मुशायरे का आकर्षण प्रभावित न हो।
4. अगर कोई रचनाकार एक दो शेर या एक दो छंद-बंद पेश करता है तो उसे आठ घंटे का समय नहीं दिया जाएगा। ऐसी पेशकश के तुरंत बाद भी अन्य रचनाकार अपनी पोस्ट पेश कर सकता है।
5. मेरे ख्याल से आठ घंटे का समय केवल उसी रचना को मिलना चाहिए जिसमें कम से कम पाँच शेर हों। अगर वह ग़ज़ल या नज़्म या कोई गीत आदि है तो उसमें कम से कम तीन बंद ज़रूर होने चाहिएं।
6. रचनाकार को यह कोशिश करनी चाहिए कि उसकी रचना या कविता शायरी के मानकों को पूरा करती हो। इस विषय में यदि उसे कोई कठिनाई पेश आ रही है तो वह मुशायरे में मौजूद वरिष्ठ कवियों और शायरों से निःसंकोच सलाह ले सकता है। उसकी सहायता ज़रूर की जाएगी।
7. इसी तरह अगर किसी मुशायरे या कवि सम्मेलन की रिपोर्ट लगाई जाती है तो उसके लिए भी आठ घंटे नहीं होने चाहिएँ।
आपके ही बीच का आपका अपना ही-
डॉ.रुपचन्द्र शास्त्री "मयंक"

5 comments:

Kunwar Kusumesh said...

सम्मान्य शास्त्री जी,
मेरे ख्याल से 5 वें नियम में तब्दीली की ज़रुरत है. इस समय जो लिखा है वो ये है:-

5. मेरे ख्याल से आठ घंटे का समय केवल उसी रचना को मिलना चाहिए जिसमें कम से कम पाँच शेर हों। अगर वह ग़ज़ल या नज़्म या कोई गीत आदि है तो उसमें कम से कम तीन बंद ज़रूर होने चाहिएं।

होना यूँ चाहिए:-
5. मेरे ख्याल से आठ घंटे का समय केवल उस ग़ज़ल को मिलना चाहिए जिसमें कम से कम पाँच शेर हों। अगर वह नज़्म या कोई गीत आदि है तो उसमें कम से कम तीन बंद ज़रूर होने चाहिएं।

DR. ANWER JAMAL said...

@ कुंवर साहब ! आपने ठीक ध्यान दिलाया। यह सुझाव मैंने ही दिया है। जल्दी में लिखते समय रचना और ग़ज़ल दोनों शब्द आपस में बदल गए। यह नियम ऐसे ही है जैसे कि आपने चाहा है।
शुक्रिया !
सभी बिन्दुओं से मैं इत्तेफ़ाक़ रखता हूं।
सद्र साहब का भी शुक्रिया ।
कल लखनऊ में शिक्षा को बढ़ावा देने के मक़सद से एक सम्मेलन हो रहा है, जिसमें सलीम भाई बुला रहे हैं और हम जा रहे हैं। हम ही नहीं बल्कि हमारे चार-छः ब्लॉगर साथी और भी चल रहे हैं।
आप सब भी आमंत्रित हैं।
आइयेगा, अगर आ सकें तो।

http://ahsaskiparten.blogspot.com/2011/05/7.html

शालिनी कौशिक said...

shastri ji aapke sujhav bahut achchhe hain bas padhne me thodi der ho gayee koshish karoongi ki inka aksrash palan karoon. aap bade hain aur aap jo bhi sujhav yahan de rahe hain ve blog kee behtari ke liye hain isliye unhe manne se inkar kiya bhi kaise ja sakta hai aur hamme itna gyan nahi hai jo ham aapse badhkar sujhav de saken .aabhar.

shanno said...

शुक्रिया शास्त्री जी. बहुत उम्दा सुझाव हैं आपके ..इनसे सहमत हूँ.

डा. श्याम गुप्त said...

सही सुझाव हैं....सहमत...