मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Saturday, May 28, 2011

सरहद पे बरक़रार रहे अम्न ऐ ख़ुदा ! - Asad Raza Naqvi





ऐसे भी इस जहान में कुछ ख़रदिमाग़ हैं
जो जंग चाहते हैं ‘असद‘ हिंदो-पाक में
सरहद पे बरक़रार रहे अम्न ऐ ख़ुदा !
स्कीम ऐसे लोगों की मिल जाए ख़ाक में 
   
   -असद रज़ा

शब्दार्थ 
ख़र-गधा, ख़रदिमाग़-मूर्ख

2 comments:

शालिनी कौशिक said...

khuda kare mulk me aisa bhi din aaye,
asad ji,aapka nam aapsi prem badhaye.
prastut karta anwar jamal ji ka bhi bahut bahut shukriya.

Anjana (Gudia) said...

आमीन