मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Saturday, May 21, 2011

न्याय और शांति की आड़ में पश्चिमी देशों की संयुक्त साज़िश - Asad Raza Naqvi

मग़रिबी मुल्कों के दाँव की ये साज़िश है
अहले मशरिक़ को आपस ही में लड़ाया जाए
ख़ुद तो महफ़ूज़ रहें, एशिया अफ़्रीक़ा को
तीसरी जंग का मैदान बनाया जाए

-असद रज़ा
asadrnaqvi@yahoo.co.in
शब्दार्थ
मग़रिबी मुल्कों - पश्चिमी देशों
अहले मशरिक़ - पूर्वी देशों के निवासी
महफ़ूज़ - सुरक्षित

4 comments:

दिनेशराय द्विवेदी said...

ये भी साजिश का हिस्सा है कि यह कहा जा रहा है कि पश्चिमी मुल्क पूर्वी देशों को आपस में लड़ा कर अपना मसला हल करना चाह रहे हैं। वास्तव में यह पूंजीवाद-साम्राज्यवाद की साजिश है। पश्चिमी देशों की जनता भी इस के विरुद्ध लड़ रही है। जब हम पश्चिमी देश कहते हैं तो बहुत से उन देशों और लोगों को भी उस साजिश में शामिल कर लेते हैं जो खुद उस साजिश के खिलाफ हैं। इस तरह हम साजिश के विरुद्ध अपनी लड़ाई को कमजोर करते हैं।

DR. ANWER JAMAL said...

@ मान्यवर , यह सही है कि पश्चिमी देशों की जनता भी मुखर विरोध करती है और कुछ पश्चिमी देश भी विरोध करते हैं लेकिन उनका सम्मिलित विरोध भी इराक़ पर नाटो देशों के अकारण हमले को न रोक पाया।
पश्चिमी देशों की साज़िश से तात्पर्य इन्हीं आतंकवादी देशों की साज़िश से है। इनकी नीतियाँ पूर्वी देशों के लिए बरबादी का कारण बन रही हैं ।
इसके लिए एशिया और अफ़्रीक़ा को मिलकर सोचना चाहिए ।
धन्यवाद !

virendra sharma said...

ज़नाब के ब्लॉग पे आके उर्दू शब्द कोष में इजाफा ही होगा .हम आयेंगें ज़रूर आयेंगें .आपने जो कुछ कहा उसमें सत्य का अंश ज़रूर है पूर्ण सत्य हो यह ज़रूरी भी नहीं .

Shalini kaushik said...

bahut khoobsurati se aapne bahut badi bat kahdee asad ji.satya se bharpoor.