मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Saturday, April 23, 2011

हमारे क़त्ल को कहते हैं ख़ुदकुशी की है Murder

ये अशआर शालिनी कौशिक जी ने अपने एक मज़मून  में पेश किये थे . हमें अच्छे लगे , सो आज उस मज़मून में से सिर्फ ये अशआर पेशे ए ख़िदमत हैं:


"इंसाफ जालिमों की हिमायत में जायेगा,
ये हाल है तो कौन अदालत में जायेगा."

                            -राहत इन्दौरी


"वो हादसा तो हुआ ही नहीं कहीं,
अख़बार की जो शहर में कीमत बढ़ा गया,
सच ये है मेरे क़त्ल में वो भी शरीक था,
जो शख्स मेरी क़ब्र पे चादर चढ़ा गया.

                             -ख़ालिद ज़ाहिद 


"अजीब लोग हैं क्या मुन्सफी की है,
हमारे क़त्ल को कहते हैं ख़ुदकुशी की है."
                                -हफ़ीज़ मेरठी


"टुकड़े-टुकड़े हो गया आइना गिर कर हाथ से,
मेरा चेहरा अनगिनत टुकड़ों में बँटकर रह गया."
                                 -मुज़फ्फर रज़मी

12 comments:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

डॉ. अनवर जमाल साहिब!
आपको योमे-पैदाइश पर बहुत-बहुत मुबारकवाद!

Kunal Verma said...

अच्छे अशआर

Kunwar Kusumesh said...

डॉ.अनवर जमाल साहब,
मुशायरा ब्लॉग पर आज पहली बार लगाए गए शेर मुशायरा शीर्षक के अनुकूल लगे. ब्लॉग से ही पता चल रहा है की आज आपका जन्म दिन भी है.
हाज़िर है यौमे-पैदाइश पर मेरी क़लम से आपके लिए निकली निम्न दिली मुबारकबाद:-
हरपल खुशियाँ आसपास हों कभी न हों नाशाद.
ऊपर वाले से भी मिलती रहे सदा इम्दाद.
दूर बहुत हूँ करता रहता फिर भी हरदम याद.
जन्म-दिवस पर क़ुबूल करिये मेरी मुबारकबाद.

DR. ANWER JAMAL said...

बुजुर्ग जनाब मयंक जी और भाई कुणाल जी ! आपकी मुबारकबाद तहे दिल से क़ुबूल है लेकिन मयंक जी आप यह बताएं कि मेरी तारीख़े पैदाइश के बारे में आपने कहाँ से जाना ?
क्या फ़ेसबुक से ?

DR. ANWER JAMAL said...

शुक्रिया जनाब कुँवर साहब ! इस मौक़े पर आप कोई रचना पेश करते तो मज़ा दोबाला हो जाता ।

शिखा कौशिक said...

Anwar ji janmdivas ki hardik shubhkamnayen .

शालिनी कौशिक said...

mere namm ko lene ke liye aabhar.
janam din ke bare me sanshay paida kar aap mithai khilane se nahi bach sakte ham to ye mankar chalte hain ki jab koi is dunia me hai to vah kisi n kisi din to paida hua hi hoga isliye aapka janamdin aaj man liya to shubhkamnayen free me nahi mithai khilakar hi sweekar keejiyega.happy birthday.

डा. श्याम गुप्त said...

अनवर जी, जन्म दिन की बधाइयां---एक छप्पय पेश है...ब्रजभाषा ...

"सौरभ सुख सम्रिद्धि कौ, जीवन अनुपम होय ।
काव्य-कला,रस-सिद्धि हो,ललित भाव शुचि सोय।
निष्कन्टक हों पन्थ, दूर बाधायें हों सब ।
कीर्ति-कुमुदिनी फ़लै,होय मंगलमय अग-जग ।
छलकै ग्यान की गागरी,शत शत शरद की चांदनी ।
ग्यानाम्रित घट रस पियें,शत शत शरद की चांदनी॥"

DR. ANWER JAMAL said...

@ डाक्टर श्याम गुप्ता जी ! मैं आपके प्यार के लिए बहुत आभारी हूँ .
आपका छप्पय देख कर तो मुझे ऐसा चक्कर सा आया कि अपना छप्पर नज़र आने लगा . हकीक़त यह है कि आज मुझे माघ और कालिदास की याद हो आयी. जब तक आप जैसे विद्वान मौजूद हैं तब तक पिछले किसी कवि को जन्म लेने की ज़रुरत नहीं है . उन्हें पितृ लोक में बैठे हुए ही अपनी रचनाएं एक दूसरे को सुनानी पड़ रही होंगी सबको, मात्र आपके कारण .
धन्य भाग हमारे जो आप हमारे ब्लॉग पधारे .

@ शालिनी जी ! मिठाई खानी है तो पहले बर्थडे गिफ्ट भेजना पड़ेगा. अपना दामन बचाकर आप हमें क्यों मूंडना चाहती हैं वकीलों की तरह ?

DR. ANWER JAMAL said...

@ शिखा जी ! आपकी बधाई हमें कुबूल है . ज़रा यहाँ भी तो देखिये .
जनाब अख्तर खान साहब ने क्या क्या लिख डाला हमारे बारे में ?

सालगिरह मुबारक हो अनवर भाई आपका जलवाए जमाल ता उम्र बना रहे ......

Sadhana Vaid said...

जन्मदिन पर मेरी भी शुभकामनायें स्वीकार करें ! इस शुभ दिन की आपको हार्दिक बधाइयाँ !

रश्मि प्रभा... said...

dher sari shubhkamnayen