मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Sunday, April 17, 2011

सपनों का टूटना

सपनों के टूटने की आवाज नहीं होती 
जो रख सको निशानी टुकड़े भी नहीं मिलते .

                                                 शिखा कौशिक  

3 comments:

DR. ANWER JAMAL said...

...लेकिन दामन तर हो जाता है।

शालिनी कौशिक said...

anvar jamal ji se poorntaya sahmat.

shanno said...

बहुत खूब...शिखा जी...