मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Wednesday, April 20, 2011

"मेरे प्यारे वतन" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


 आज प्रस्तुत कर रहा हूँ 
अपना एक पुराना देश-भक्ति गीत!
जिसको अपना मधुर स्वर दिया है
मेरी जीवनसंगिनी "श्रीमती अमर भारती" ने



मेरे प्यारे वतन, जग से न्यारे वतन।
मेरे प्यारे वतन, ऐ दुलारे वतन।। 


अपने पावों को रुकने न दूँगा कहीं,
मैं तिरंगे को झुकने न दूँगा कहीं,
तुझपे कुर्बान कर दूँगा मैं जानो तन।
मेरे प्यारे वतन, ऐ दुलारे वतन।।

जन्म पाया यहाँ, अन्न खाया यहाँ,
सुर सजाया यहाँ, गीत गाया यहाँ,

नेक-नीयत से जल से किया आचमन।
मेरे प्यारे वतन, ऐ दुलारे वतन।।


तेरी गोदी में पल कर बड़ा मैं हुआ,
तेरी माटी में चल कर खड़ा मैं हुआ,
मैं तो इक फूल हूँ तू है मेरा चमन।

मेरे प्यारे वतन, ऐ दुलारे वतन।।

स्वप्न स्वाधीनता का सजाये हुए,
लाखों बलिदान माता के जाये हुए,
कोटि-कोटि हैं उनको हमारे नमन।
मेरे प्यारे वतन, ऐ दुलारे वतन।।



जश्ने आजादी आती रहे हर बरस, 
कौम खुशियाँ मनाती रहे हर बरस, 
देश-दुनिया में हो बस अमन ही अमन। 
मेरे प्यारे वतन, ऐ दुलारे वतन।। 

20 comments:

Udan Tashtari said...

वाह!! क्या खूब लिखा गया और क्या खूब गाया गया....गायन का अंतिम बंद लेखन से गुम है...उसे भी जोड़ दिजिये...आनन्द आ गया.


आभार...बधाई.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

भाई समीर लाल जी!
आपकी पारखी नज़र को सलाम!
--
सभी जगह जाकर कमेंट करना और पोस्टों को पढ़ना कोई हँसी-खेल नहीं है।
--
गायन का अन्तिम छन्द कविता में जोड़ दिया गया है।

Minakshi Pant said...

वतन को याद कर लिखी बहुत खुबसूरत रचना |
आपकी रचना पढ़कर हमे भी ये गीत याद आ गया |
ये मेरे प्यारे वतन ये मेरे बिछडे चमन
तुझ पे दिल कुर्बान |
तू ही मेरी आरजू , तू ही मेरी जुस्तजू
तुझपे में कुर्बान |

शालिनी कौशिक said...

jitna deshprem lekhan me hai usse kahin jyada amar bharti ji ki aavaj me jhalak raha hai.bahut sundar bhavpoorn abhivyakti.bahut prerak prastuti..

Kunal Verma said...

राष्ट्र के प्रति समर्पित करने वाला बहुत ही खूबसूरत रचना

DR. ANWER JAMAL said...

@ आदरणीय शास्त्री जी ! आपकी रचना पूरी पढ़ी और सूनी आधी . हमारी छोटी बेटी ने हैडफ़ोन छीन लिया है . जितना पढ़ा और सुना , अच्छा लगा और अभी हमने अपनी बेटी से पूछा कि आपको गीत कैसा लगा तो वह बोली 'अच्छा'.
इससे ज्यादा वह बोल नहीं पाती, अभी सिर्फ तीन साल की है .
आपने बहुत ही अच्छी रचना प्रस्तुत की है. अपने घर और वतन की मुहब्बत आदमी की फितरत और स्वभाव का हिस्सा है.
आपने फितरी जज़्बात को बहुत अछे अलफ़ाज़ का जामा पहनाया है .
शुक्रिया .
अब मुशायरे में निमंत्रित लोग खासी तादाद में आ चुके हैं , लिहाज़ा आपको इस साल के लिए आपको इस महफ़िल ए मुशायरा का 'सद्र' (अध्यक्ष) मुन्तखब किया जाता है .
तमाम शो'रा ए किराम और सम्माननीय कवियों से गुजारिश है कि वे सद्र मोहतरम के उसूल ओ जज़्बात का ख़याल रखें .
यह एक अदबी महफ़िल है और यहाँ अदब को तरजीह ज़रूर दी जानी चाहिए .
जनाब शास्त्री जी से दरख्वास्त है कि वे मंसब ए सदारत कुबूल फरमाएं .
शुक्रिया .

वन्दना said...

बहुत सुन्दर रचना……………बधाई हो अध्यक्ष बनने पर्।

Archana said...

मुझे खुशी है कि मैने उन्हे इसके अलावा भी सुना है,सीखने का मौका मिला उनसे ...आभार आपका...

वन्दना said...

आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
कल (21-4-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।

http://charchamanch.blogspot.com/

डा. श्याम गुप्त said...

सुन्दर देशभक्ति का गीत....बधाई शस्त्रीजी..

---ये पिछली पोस्ट से आठ घन्टे के अन्तर के बाद का क्या अर्थ है...यदि हर ८ घन्टे से २ मिनट पहले किसी और ने पोस्ट कर दिया तो पिछडने वाला कभी कर ही न पायगा....

Sawai Singh Rajpurohit said...

बहुत सुंदर लिखा आपने

Kunwar Kusumesh said...

देशप्रेम से ओत-प्रोत गीत की बधाई.

shanno said...

बहुत बढ़िया देश प्रेम पर...

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत सुन्दर और देश भक्ति से ओत प्रोत गीत ..सुनना भी कर्णप्रिय लगा

Neelam said...

aapki lekhni main jo desh prem dikha aur jise apni khoobsurat aawaz aur feeling ke sath Amar bharti ji ne usme chaar chaand laga diye..jahan kalam aur sur ek sath ho wahan aise sunder geet kaise nahi banenge..sunkar aaj kaano ko behaddsukun mila ,
Asha karti hoon aage bhi Shrimati Amar Bhaarti ji ko hum sun paayenge.

bahut bahut abhaar ap dono ka ,iss sunder desh bhakti geet ko padhne aur sunaane ke liye.

Neelam said...

aapki lekhni main jo desh prem dikha aur jise apni khoobsurat aawaz aur feeling ke sath Amar bharti ji ne usme chaar chaand laga diye..jahan kalam aur sur ek sath ho wahan aise sunder geet kaise nahi banenge..sunkar aaj kaano ko behaddsukun mila ,
Asha karti hoon aage bhi Shrimati Amar Bhaarti ji ko hum sun paayenge.

bahut bahut abhaar ap dono ka ,iss sunder desh bhakti geet ko padhne aur sunaane ke liye.

Dr (Miss) Sharad Singh said...

बहुत सुन्दर रचना……………बहुत सुन्दर स्वर...
हार्दिक बधाई।

वीना said...

स्वप्न स्वाधीनता का सजाये हुए,
लाखों बलिदान माता के जाये हुए,
कोटि-कोटि हैं उनको हमारे नमन।
मेरे प्यारे वतन, ऐ दुलारे वतन।।

बहुत खूबसूरत गीत..हर वर्ष हम जश्न-ए-आजादी मनाएं....

आशा said...

बहुत अच्छी भावपूर्ण रचना |
अपने स्कूल के दिन याद आगये |आभार
आशा

dr. shama khan said...

matrebhme ke prte bhveprne rachane hea..