मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Saturday, April 23, 2011

मैं खुदा से इतना सा चाहता


निरंतर
फ़रियाद खुदा से
सब करते
कुछ ना कुछ मांगते
उस से
कोई दिल का सुकून
 माँगता
कोई धन दौलत
माँगता
मैं खुदा से इतना सा
चाहता
कभी कुछ ना माँगना पड़े
किसी से 
जब बुलाये पास
अपने
गहरी नींद से ले
जाना मुझे
21-04-2011
725-147-04-11

3 comments:

Kunal Verma said...

बेहद उम्दा गजल

एक बार पधारेँ http://premkibhasha.blogspot.com

डा. श्याम गुप्त said...

बेहतर... गीत...एवं भावना..

DR. ANWER JAMAL said...

वाह !