मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Tuesday, April 19, 2011

वो बन गए इक याद

वो तुझे छोडकर गर गए ऐ दोस्त

दिल से टूट जाएगा तू

जी चाहेगा ले लूँ विदा इस जीवन से

पर डर है,उनकी यादोँ को कहीँ भूल जाएगा तू

तुझे जीना है उनकी यादोँ के लिए

उनकी यादोँ को तन्हाँ कैसे छोड जाएगा तू

वो तो तेरी आत्मा है ऐ 'कुणाल'

क्या उसके बिन कभी जी पाएगा तू

लिया गया है: http://shabdshringaar.blogspot.com

7 comments:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

अरे वाह!
5 मिनट बाद ही दूसरी पोस्ट लगा दी!
--
मैं मुशायरे से अपने को अलग कर रहा हूँ!

Kunal Verma said...

माफी चाहता हुँ शास्त्री जी,मैँने देखा न था।ऐसी गलती दुबारा न होगी।

DR. ANWER JAMAL said...

छमा बड़ेन को चाहिए छोटन को उत्पात ? ? ?

शिखा कौशिक said...

तुझे जीना है उनकी यादोँ के लिए

उनकी यादोँ को तन्हाँ कैसे छोड जाएगा तू

वो तो तेरी आत्मा है ऐ 'कुणाल'

क्या उसके बिन कभी जी पाएगा तू
bahut khoob,
shastri ji ,
aapse nivedan hai ki kunal ji ki is galti ko jo unse galti se ho gayee hai kshma kar den .aur mushayre se alag n hon.

शालिनी कौशिक said...

तुझे जीना है उनकी यादोँ के लिए

उनकी यादोँ को तन्हाँ कैसे छोड जाएगा तू

वो तो तेरी आत्मा है ऐ 'कुणाल'

क्या उसके बिन कभी जी पाएगा तू
sundar prastuti.itni see bhool par itna bada faisla lena sahi nahi hai shastri ji,apne aur sathiyon ki bhi ichchha to aap dekhte sabhi aapki is bat me sath hain ki samoohik blogs par kam se kam 4 ghante to ek post rahni hi chahiye.vapas aa jaiye shastri ji ,ham sabhi aapse paunh.nivedan karte hain.

डा. श्याम गुप्त said...

बहुत खूब...

shanno said...

''वो तुझे छोडकर गर गए ऐ दोस्त

दिल से टूट जाएगा तू''

वाह ! कुनाल क्या अहसास हैं :) बहुत खूब...