मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Thursday, April 28, 2011

तुझे फुर्सत नहीं

तुझे फुर्सत नहीं है मेरे लिये

मेरी दुनिया में भी अँधेरे हैं l


तेरे ख्यालों में मैं हूँ या नहीं

पर तेरे ख्याल मुझको घेरे हैं

तेरा दीदार भी कभी हो जाये

इस उम्मीद में सजदे मेरे हैं l


तेरी मेहरबानियाँ हुईं हैं औरों पे

तेरे करिश्मों से हम हैरत में हैं

है इंतज़ार हमें तेरे फरमानों का

तेरा नूर तेरी तकवियत में है l


ये सारी कायनात है तेरे बूते पे

पर जीस्त में रंगे-गुलिस्तां नहीं हैं

तेरे सिवा कोई भी नहीं अपना

गमे-हयात में कोई अहबाब नहीं हैं l


मेरी साँसों में है इबादत तेरी

अपने अश्कों के फूल बिखेरे हैं

तेरी चाहत का मुझे पता नहीं

मेरी जीस्त के तुझसे ही सबेरे हैं l


तुझे फुर्सत नहीं है मेरे लिये

मेरी दुनिया में भी अँधेरे है l


-शन्नो अग्रवाल


10 comments:

शालिनी कौशिक said...

मेरी साँसों में है इबादत तेरी
अपने अश्कों के फूल बिखेरे हैं
तेरी चाहत का मुझे पता नहीं
मेरी जीस्त के तुझसे ही सबेरे हैं l
bahut khoobsurati se aapne man ke bhavon ko abhivyakt kiya hai.kripya batayen ki ''zeest''ke kya mayne hain.meri urdu zara kamjor hai.

shanno said...

शालिनी जी, मेरी रचना पर आपके इतने प्यारे कमेन्ट के लिये आपका बहुत शुक्रिया. आपने उर्दू भाषा का नाम लिया तो मेरा उर्दू के शब्दों का इल्म इतना कम है कि मैं बताने की हालत में नहीं हूँ :) सच कहती हूँ बस किसी तरह लड़खड़ाते हुये काम निकल जाता है. और जीस्त का मतलब होता है - जीवन.

DR. ANWER JAMAL said...

WAH , KHUSHI HUI PADHKAR.
SHUKRIYA.

shanno said...

shukria Anwer jii....

डा. श्याम गुप्त said...

तेरी चाहत का मुझे पता नहीं
मेरी जीस्त के तुझसे ही सबेरे हैं ---वाह..खूब...
---सुन्दर कलाम शन्नो जी...

Kunwar Kusumesh said...

शालिनी जी ने आपसे ज़ीस्त के माने पूछे हैं. चलिए मैं बता देता हूँ.ज़ीस्त (زیست) मतलब ज़िन्दगी / जीवन.
आपकी क़लम में बेहतरी के इम्कानात हैं. आप एक दिन बहुत अच्छा लिखेंगी अगर लिखना ऐसे ही आपका जारी रहा तो.
उर्दू के उन्हीं शब्दों का इस्तेमाल करें तो बेहतर होगा जिनकी जानकारी हो.
एक शुभचिंतक.

shanno said...

आप सभी लोगों के कमेंट्स का हार्दिक धन्यबाद.

@ कुँवर जी, आपकी शुभकामनाओं और सलाह के लिये मैं शुक्रगुजार हूँ.

शालिनी कौशिक said...

kunvar ji aapka bahut bahut dhanyawad.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

मेरी साँसों में है इबादत तेरी
अपने अश्कों के फूल बिखेरे हैं
तेरी चाहत का मुझे पता नहीं
मेरी जीस्त के तुझसे ही सबेरे हैं l
--
गजल के सभी मिसरे बहुत ही लाजवाब है!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

मेरी साँसों में है इबादत तेरी
अपने अश्कों के फूल बिखेरे हैं
तेरी चाहत का मुझे पता नहीं
मेरी जीस्त के तुझसे ही सबेरे हैं l
--
गजल के सभी मिसरे बहुत ही लाजवाब है!