मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Monday, April 18, 2011

आप मुस्कुराये

आप मुस्कुराये तो दिल बाग़-बाग़ हो गया

आपकी दुआ से कुछ अपना अंदाज़ हो गया

मुझ नाचीज़ पर कुछ खुदा की मेहरबानी हुई

और कुछ आपको भी मुझ पर नाज़ हो गया.

- शन्नो अग्रवाल


8 comments:

शालिनी कौशिक said...

bahut khoob kaha hai aapne ...

DR. ANWER JAMAL said...

Nice sher

काफ़ी है अर्ज़े-ग़म के लिए मुज़महिल हंसी
रो-रो के इश्क़ को तमाशा न बनाइये
बेमौत मार डालेंगी ये होशमंदियां
जीने की आरज़ू है तो धोके भी खाइये

shanno said...

अनवर साहब, आपका ये कमेन्ट लगता है धोखे से मेरे शेर के लिये आ गया :)

DR. ANWER JAMAL said...

आप तो बस मुस्कुराइए शन्नो जी !
धोखे से नहीं आपको पढवाने की गरज से .

shanno said...

हा हा हा..अच्छा तो ये बात है, अनवर जी....

DR. ANWER JAMAL said...

जी हां !
आप मुस्कुराये तो दिल बाग़-बाग़ हो गया
आपकी दुआ से कुछ अपना अंदाज़ हो गया

डा. श्याम गुप्त said...

----अजी दिल बाग़-बाग़ हो गया..शन्नो जी....सुन्दर..

shanno said...

शुक्रिया...शुक्रिया. मेरे अल्फाज़ मुझ पर ही इस्तेमाल...वाह ! बहुत खूब :)