मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Friday, April 29, 2011

खुशामद भी जरूरी है

खुशामद की नजारत दुनिया में सभी करते हैं

जो कहते हैं नहीं करते वो झूठ बोला करते हैं l

कुछ लोग पीठ पीछे तो बद्दुआ दिया करते हैं

फिर जरूरत होने पे खुशामद किया करते हैं l

तौहीन करके अक्सर हँसते हैं लोग जिनपर

खुदगर्जी में उनके आगे नाक रगड़ा करते हैं l

रखते हैं बड़ा अपनापन खुशामद करने वाले

खुशी के मौकों पर वो दिल में जला करते हैं l

ऐसे मतलब परस्तों पर हँसती है खूब दुनिया

ऐसे अहसान फरोशों से लोग बचा करते हैं l

पर आपस में प्यार हो और झगड़ा हो जाये

तब भी तो मनाने में खुशामद ही करते हैं l

तो तरीके भी होते हैं कितने ही खुशामद के

बख्त आने पर ही उनके जलवे दिखा करते हैं l

खुशामद की नजाफत में हर कोई सलामत हो

जो कहते हैं नहीं करते वो झूठ बोला करते हैं l

- शन्नो अग्रवाल

5 comments:

शिखा कौशिक said...

बहुत सुन्दर ...बधाई

डा. श्याम गुप्त said...

--सुन्दर रचना...सही बात है खुशामद भी जरूरी है..यह भी एक गुण है....

--हां मतलब परस्ती, अहसान फरामोशी,खुदगर्ज़ी अलग अलग भाव है---
...रूठने मनाने आदि जरूरी बातों में खुशामद,अपनी गलती सुधारने का भाव होता है अन्यथा खुशामद में मूलतः मतलब परस्ती होती है..

DR. ANWER JAMAL said...

Wah !
Shanno ji' apke karan gupta ji kahin tak to mane .
Best wishes.

shanno said...

@ शिखा जी, शुक्रिया.

@ अनवर जी, शुक्रिया. मैंने तो बस वास्तविकता पर लिखा है :)

@ श्याम जी, शुक्रिया. जिंदगी में कभी-कभार लोगों की खुशामद करनी ही पड़ती है..खाली तारीफ़ करके ही जिंदगी नहीं गुजरती है..और बात आपकी भी सही है कि इसमें होती मतलब परस्ती है :)

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत बढ़िया गजल पेश की है आपने!