मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Thursday, April 21, 2011

मसरूफ़ियत

हालात बदल जाते हैं पर इंसान तो बदल जाता नहीं
मसरूफ़ है जिंदगी इतनी कि बख्त मिल पाता नहीं
कभी वो भी दिन थे जब होती थीं अक्सर मुलाकातें
सोचते रहते हैं हम अब सबसे मिलना हो पाता नहीं.

- शन्नो अग्रवाल

8 comments:

शिखा कौशिक said...

वाह ! बहुत खूब , मुकर्रर इरशाद. सुबहानल्लाह

DR. ANWER JAMAL said...

Nice feelings.

Neelam said...

wah bahut khoob .

Kunal Verma said...

खूबसूरत रचना

shanno said...

शुक्रिया आप सभी को :)

डा. श्याम गुप्त said...

"कभी वो भी दिन थे जब होती थीं अक्सर मुलाकातें.."--क्या बात है.ये बातें ये मुलाकातें....

Kunwar Kusumesh said...

बहुत खूब

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत उम्दा और लाजवाब!