मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Tuesday, April 19, 2011

मतलब नहीं रहा.....

हम तुमसे मिलने आये हैं सब काम छोड़कर, 

तुम पर ही हमसे मिलने को वक़्त न हुआ.

सुनना तो चाहते थे तुमसे बहुत कुछ मगर,

तुमने ही हमसे अपने दिल का हाल न कहा.

गायब तो तुम ही हो गए थे बीच राह में,

मिलने को तुमसे हमने कितनी बातों को सहा.

सब कुछ गँवा के हमने रखी दोस्ती कायम,

तुम कहते हो हमसे कभी मतलब नहीं रहा.
                        शालिनी कौशिक 
                              

6 comments:

Kunal Verma said...

बेहद खुबसूरत रचना

DR. ANWER JAMAL said...

एक अच्छी रचना।

सदा said...

बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

डा. श्याम गुप्त said...

सब कुछ गँवा के हमने रखी दोस्ती कायम,

तुम कहते हो हमसे कभी मतलब नहीं रहा.

अच्छी रचना ..बधाई

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत सुन्दर रचना!
शालिनी कौशिक को शुभाशीष!

shanno said...

बहुत सुंदर रचना. ''सब कुछ गँवा के हमने रखी दोस्ती कायम''