मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Thursday, April 14, 2011

नज़र कभी आये नहीं


मोहब्बत के
बादल तो आये
मगर कभी बरसे नहीं
 निरंतर प्यास तो जगायी
मगर कभी बुझायी नहीं
अक्स अपना दिखाते थे
सूरत कभी दिखायी नहीं
दिल पे
दस्तक निरंतर देते थे
दरवाज़ा खोला तो
कभी दिखे नहीं
ख़्वाबों में रोज़ आते थे
दिन में
नज़र
कभी आये नहीं 
14-04-2011
671-104-04-11

1 comments:

DR. ANWER JAMAL said...

निरंतर जी !
हाय ! क्या बात है ?
वाह !
Most Welcome.