मुशायरा::: नॉन-स्टॉप

Thursday, April 14, 2011

कामयाबी

कामयाबी चुपके से जब रह गुज़र तक आएगी,
एक दिन शोहरत भी मुझसे मिलने घर तक आएगी.
           शायर-निसार
        प्रस्तुति-शालिनी कौशिक
     

2 comments:

शिखा कौशिक said...

bahut khoob .

DR. ANWER JAMAL said...

कहीं शोहरत के बजाय हम ही न चले आएँ आपके घर पर आपसे मिलने !

हा हा हा !!

उम्दा शेर !!!